1. सैनिक कारण : a. राजपत ू ों के पास स्थाई सेना की कमी b. घड़ सवार सेना की श्रेष्ठ ु c. श्रेष्ठ रणनीति d. राजपत ू ी हाथी सेना कमजोर e. गप्ु तचर व्यवस्था f. राजपत ू का उच्च आदर्शो में विश्वास g. तर्कों ु में धार्मिक उत्साह h. सरु क्षित सेना की कमी i. राष्ट्रीय उत्साह की कमी 2. राजनीतिक कारण a. राजपत ू ों की सामंती प्रथा b. दोषपर्ण ू शासन व्यवस्था c. सदृ ढ़ ु सामंती नीति की कमी d. राजनीतिक एकता का अभाव e. राजपत ू ों की अंतःकलह f. राजनीतिक उदासीनता 3. धार्मिक कारण a. धार्मिक स्थिति b. इस्लाम का भ्रातत्ृ वी रूप 4. सामाजिक कारण a. संकीर्ण सामाजिकता b. विलासी जीवन 1. इल्तत ु मिश का प्रारं भिक जीवन 2. इल्तत ु मिश का सिंहासनारोहन 3. इल्तत ु मिश की कठिनाइयां a. विरोधी अमीरों की समस्या b. राजपत ू नरे शों का विरोध c. यल्दौज तथा कुबाचा की महत्वाकांक्षा d. मंगोल के आक्रमण का भय e. खोखरों की समस्या f. दर्ब ु ल राज्याधिकार g. केंद्रीय सरकार की दर्ब ु लता h. अस्त-व्यस्त प्रशासन 4. इल्तत ु मिश द्वारा कठिनाइयों का निवारण a. यल्दौज का दमन b. विरोधी अमीरों का दमन c. मंगोलो से दिल्ली राज्य की रक्षा करना d. कुबाचा का दमन e. राजपत ू का दमन f. बंगाल की विजय 5. यद् ु धों का परिणाम और महत्व 6. इल्तत ु मिश की शासन व्यवस्था / प्रशासनिक कार्य/ उपलब्धियां a. न्याय व्यवस्था b. चालीसा गल ु ामों के दल का गठन c. इक्ता प्रथा का प्रचलन d. खलीफा से मान्यता प्राप्त करना e. मद्र ु ा में सध ु ार f. सेना g. तर्कों ु को पर्वतीय प्रदे शों में बसाना 7. इल्तत ु मिश कठिनाइयों का समाधान करने में कहां तक सफल रहा? 1. बलबन का प्रारं भिक जीवन 2. बलबन का सिंहासनारोहन 3. बलबन की समस्याएं: a. राजकोष की रिक्तता b. राजपत ू सदस्यों के उपद्रव c. समसी अमीरों का विद्रोह d. मंगोल के आक्रमण की समस्या 4. बलबन की उपलब्धियां अथवा सल्तनत को सदृ ु ढ़ करने के प्रयास a. मेवातियों का दमन b. डाब के विद्रोहियों का दमन c. कटे हार के विद्रोह का दमन d. तरु गिल के विद्रोह का दमन e. मंगोल के आक्रमण से सीमांत की रक्षा f. चालीसा अमीरों के दल का दमन g. ताज की प्रतिष्ठा में वद् ृ धि h. केंद्रीय शासन को सदृ ु ढ़ करना i. गप्ु तचर व्यवस्था में सध ु ार j. न्याय व्यवस्था में सध ु ार k. सैन्य व्यवस्था में सध ु ार 5. बलबन के राजस्व सिद्धांत a. राजा के दै वी अधिकारों में विश्वास b. सल् ु तान की निरं कुशता में विश्वास c. ताज की प्रतिष्ठा में वद् ृ धि d. शाही वंशज होने का दवा e. आदर्श शासक f. न्याय की प्रतिष्ठा स्थापित करना g. शक्तिशाली सेना का गठन 6. बलबन का मल् ू यांकन और चरित्र a. महान व्यक्तित्व b. महान सेनानायक c. कुशल प्रशासक d. विद्वानों का आश्रयदाता 1. अलाउद्दीन खिलजी की साम्राज्यवादी नीति 2. उत्तर भारत की विजय a. गज ु रात पर विजय b. रणथम्भौर पर आक्रमण c. चित्तौड़ की विजय d. मालवा की विजय e. सिवाना पर अधिकार f. जालौर की विजय 3. दक्षिण भारत की विजय के कारण 4. दक्षिण भारत की विजय a. दे वगिरी का आक्रमण b. वारं गल की विजय c. द्वारा समद्र ु की विजय d. माबर की विजय e. दे वगिरी पर पन ु ः आक्रमण 5. दक्षिण नीति की समीक्षा 6. अलाउद्दीन खिलजी के आर्थिक सध ु ार a. खाद्यान्नों का मल् ू य b. भाव नियंत्रण c. व्यापारियों पर नियंत्रण d. अन्नागार और राशन व्यवस्था e. बाजार का प्रबंध f. दोष 7. राजस्व सध ु ार a. भमि ू की माप तथा कर निर्धारण b. कर वद् ू ी में कठोरता ृ धि और उसकी वसल c. जागीरदारी प्रथा का अंत d. राज्य कोष को बढ़ाने का प्रयत्न e. राजस्व अधिकारियों के विशेषाधिकारों को समाप्त करना f. राजस्व विभाग का पन ु र्गठन 1. फिरोज शाह तग ु लक का सिंहासनारोहन 2. गह ृ नीति: a. शासन व्यवस्था b. राजस्व नीति c. सिंचाई एवं नेहरों का निर्माण d. सार्वजनिक निर्माण कार्य e. न्याय तथा परोपकारी कार्य f. विद्या की वद् ृ धि g. धार्मिक नीति h. दास प्रथा i. सेना 3. फिरोज शाह की चारित्रिक त्रटि ु यां एवं तग ु लक वंस के पतन में सहयोग a. विदे श नीति b. धर्म प्रभावित राज्य c. सैनिक व्यवस्था d. शासन में भ्रष्टाचार तथा शिथिलता e. दास प्रथा f. धार्मिक कट्टरता g. सल् ु तान की विवेकहीन उदारता 1. मोहम्मद तग ु लक का प्रारं भिक जीवन 2. गयासद् ु दीन तग ु लक की मत्ृ यु 3. मोहम्मद तग ु लक की योजनाएं a. कृषि विभाग की स्थापना b. दोआब में कर वद् ृ धि c. राजधानी परिवर्तन d. सांकेतिक मद्र ु ा का प्रचलन e. खरु ासान विजय की योजना f. नगरकोट की विजय g. कराजल की चढ़ाई 4. असफलता के कारण a. सल् ु तान का उग्र स्वभाव b. सल् ु तान का अहं कारी स्वभाव c. उलेमा वर्ग की नाराजगी d. मानव चरित्र का पारखी नहीं e. योजनाओं का समय से आगे होना f. प्रजा का सहयोग g. विपरीत परिस्थितियाँ 1. दिल्ली सल्तनत का स्वरूप 2. केंद्रीय शासन 3. प्रांतीय शासन 4. स्थानीय शासन 5. सैनिक व्यवस्था 6. वित्त व्यवस्था 7. किस तथा गप्ु तचर व्यवस्था 1. शेरशाह का उत्थान a. बिहार का स्वतंत्र शासक बनना b. चन ु ार पर अधिकार c. बंगाल की विजय d. शेरशाह और हुमायंू e. गक्खर प्रदे श की विजय f. बंगाल में व्यवस्था स्थापित करना g. मालवा विजय h. रायसीन की विजय i. सिंध तथा मल् ु तान विजय j. मारवाड़ पर विजय k. कालिंजर विजय 2. शेरशाह की प्रशासनिक उपलब्धियां अथवा शासन प्रबंध a. केंद्रीय शासन प्रबंध b. सरकारों का प्रबंध c. परगनों का प्रबंध d. ग्राम प्रबंध e. भमि ू कर व्यवस्था f. सैन्य प्रबंध g. पलि ु स प्रबंध h. गप्ु तचर व्यवस्था i. न्याय व्यवस्था j. मद्र ु ा सध ु ार 3. चरित्र एवं मल् ू यांकन 1. धार्मिक सहिष्णत ु ा का विकास 2. अकबर की धार्मिक नीति a. यद् ु ध बंधिया को गल ु ाम बनाने की प्रथा पर रोक b. तीर्थ यात्रा कर को समाप्त करना c. जरिया को समाप्त करना d. इबादत खाने की स्थापना e. इबादत खाने को सभी धर्म के लिए खोलना f. धार्मिक उपासना की स्वतंत्रता g. धर्म प्रमख ु का पद ग्रहण करना h. दीन ए इलाही की स्थापना, पतन के कारण 3. हिंद ू नीति के परिणाम a. राजनीतिक परिणाम b. सांस्कृतिक व सामाजिक परिणाम 4. अकबर की राजपत ू नीति a. उदार नीति के कारण i. साम्राज्य की सरु क्षा व स्थायित्व ii. लोकप्रियता का निवारण iii. राजपत ू ाने का भौगोलिक महत्व iv. साम्राज्य विस्तार में सहायक v. अमीरों पर नियंत्रण करने के लिए vi. अफगान तथा उजबेगोंके विरुद्ध शक्ति संगठन करने के लिए vii. सल ु ह ए कुल की भावना की प्रेरणा viii. राजपत ू नीति b. राजपत ू नीति का क्रियात्मक रूप i. राजपत ू को उच्च पद प्रदान करना - प्रशासकीय विभाग में , सैनिक क्षेत्र में , दरबार में ii. राजपत ं ू ों से वैवाहिक संबध iii. धार्मिक उदारता की नीति अपनाना iv. सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में सध ु ार v. आंतरिक स्वतंत्रता प्रदान करना vi. स्वतंत्रता प्रेमी राजपत ू के विरुद्ध सैनिक अभियान 1. स्वयं ही अधीनता स्वीकार करने वाले 2. संघर्ष के बादसमान जनक समझौता करने वाले 3. अंत तक संघर्ष करने वाले 1. मग ु ल शासको की धार्मिक नीति a. बाबर की धार्मिक नीति b. हुमायंू की धार्मिक नीति c. अकबर की धार्मिक नीति d. जहांगीर की धार्मिक नीति e. शाहजहां की धार्मिक नीति f. औरं गजेब की धार्मिक नीति i. कारण 1. इस्लाम धर्म में कट्टर आस्था 2. राजनीति में हिंदओ ु ं के बढ़ते हुए प्रभाव से चिंता 3. उत्तराधिकार के यद् ु ध में राजपत ू ों की भमि ू का 4. अमीर वर्ग का नैतिक पतन ii. अंतर्गत कार्य 1. इस्लाम विरोधी प्रथाओं पर प्रतिबंध और इस्लाम का समर्थन 2. नैतिक समावेश 3. हिंद ू विरोधी नीति a. मंदिरों और दे व मर्ति ू यों का विध्वंस b. जरिया का पन ु ः आरोपण c. भेद नीति पर आधारित चग ंु ी d. हिंद ू को सरकारी नौकरियों से वंचित करना e. हिंद ू पाठशाला का विध्वंस f. बलात या प्रलोभन द्वारा धर्म परिवर्तन g. यद् ु ध बंदियों को मस ु लमान बनाना h. तीर्थ यात्रा पर कर लगाना i. अन्य 4. सिया और सफि ू यों के साथ दर्व्य ु वहार iii. परिणाम 1. आर्थिक परिणाम 2. राजनीतिक परिणाम a. राजपत ू का विद्रोह b. सिखों का विद्रोह c. सतनामियों का विद्रोह d. जाटों का विद्रोह e. औरं गजेब और मराठा f. शासन व्यवस्था का अस्त-व्यस्त होना g. राष्ट्रीय राज्य की समाप्ति h. राजपत ू ों से सहयोगसे वंचित i. मग ु ल साम्राज्य के पतन के लिए उत्तरदाई 2. मग लों क े पतन क े कारण ु a. विशाल साम्राज्य b. आयोग्य उत्तराधिकारी c. उत्तर कालीन मग ु ल शासको का दिमागी दिवालिया d. प्रांतपत्तियों की स्वतंत्रता e. करो की अधिकता f. रिक्त राजकीय कोष g. राजपत ू का उदय h. सिखों व जाटों का उदय i. अंग्रेजों का आगमन j. औरं गजेब की दोषपर्ण ू दक्षिणी नीति k. विदे शी आक्रमण l. औरं गजेब का उत्तरदायित्व: i. धर्मांधता ii. शंकालु प्रवत्ति ृ iii. औरं गजेब के प्रशासन में दोष iv. करवध्दि ृ 1. शिवाजी की प्रारं भिक विजयें 2. मग ु लों के साथ प्रथम मठ ु भेड़ 3. कोकण विजय 4. अफजल खान की घटना 5. शाइस्ता खान पर रात्रि में आक्रमण 6. जय सिंह का महाराष्ट्र पर हमला - परु ं दर की संधि 7. शिवाजी का आगरा जाना 8. मग ु लों के साथ संधि 9. मग ु लों के साथ पन ु ः यद् ु ध 10. शिवाजी का राज्याभिषेक 11. कर्नाटक पर हमला 12. अंतिम दिन व मत्ृ यु 1. अकबर की दक्षिण नीति a. मग ु ल साम्राज्य की सीमाओं का प्रश्न b. साम्राज्यवादी व विस्तारवादी नीति c. दक्षिण की तत्कालीन राजनीतिक अस्थिरता d. धन का लालच e. अकबर का सन ु नी होना f. पर्त ु गाली समस्या को समाप्त करना g. दक्षिण विजय h. दक्षिण विजय एक स नियोजित नीति का परिणाम i. अधरू ी तथा अस्थाई दक्षिण विजय 2. जहांगीर की दक्षिण नीति a. अहमदनगर से यद् ु ध b. अस्थाई विजय c. दक्षिण के उत्तरी राज्यों में मग ु ल दबाव में वद् ृ धि d. मग ु लों के लिए हानिप्रद नीति e. मराठाों के उत्थान में सहयोगी 3. शाहजहां की दक्षिण नीति - उद्दे श्य a. विद्रोहियों के शरण स्थल को समाप्त करना b. धार्मिक कट्टरता - सन् ु नी होना c. फारस के साथ के साथ संबध ं d. आपसी फूट e. पर्व ू जों के अधरू े कार्यों को परू ा करना 4. शाहजहां की दक्षिणी राज्यों से संघर्ष a. अहमदनगर के साथ संघर्ष b. बीजापरु के साथ संघर्ष c. बीजापरु पर पन ु ः आक्रमण d. गोलकंु डा से यद् ु ध 5. औरं गजेब की दक्षिण नीति a. औरं गजेब और बीजापरु b. गोलकंु डा c. मराठा d. मल् ू यांकन औरं गजेब की राजपत ू नीति 1. कठोर और अनद ु ार नीति के कारण a. औरं गजेब की धर्मांधता की नीति b. राजपत ू नरे शों के प्रति संदेहसील c. मारवाड़ का सामरिक एवं व्यापारिक महत्व d. औरं गजेब की हिंद ू विरोधी नीति 2. औरं गजेब और मारवाड़ a. अजीत सिंह का दिल्ली से निकलना और दर्गा ु लों का विरोध करना ु दास द्वारा मग b. औरं गजेब के विरुद्ध मारवाड़ मेवाड़ का संयक् ु त मोर्चा c. यद् ु ध के विभिन्न भाग - 3 3. मेवाड़ और औरं गजेब a. शहजादे अकबर का विद्रोह b. संधि 4. परिणाम a. राजपत ू मग ु ल साम्राज्य के शत्रु b. मग ु लों का राजपत ू ों की सहायता से वंचित होना c. दक्षिण नीतिमें असफलता d. धन-धन की अपार हनी e. साम्राज्य में अराजकता व व्यवस्था f. मग ु ल सेना की अयोग्यता प्रकट होना g. मग ु ल साम्राज्य के पतन के लिए उत्तरदाई 1. बाबर की पश्चिम उत्तर सीमा नीति 2. हुमायंू की नीति 3. अकबर की नीति 4. जहांगीर की नीति 5. शाहजहां की मध्य एशिया नीति / उत्तर पश्चिमी नीति a. उद्दे श्य i. पर्व ू जों की मातभ ू ट्रांस आक्सियाना पर अधिकार करना ृ मि ii. साम्राज्य विस्तार की महत्वाकांक्षा iii. ट्रांस की राजनीतिक अव्यवस्था iv. रक्षात्मक कारण b. नीति i. नजर मोहम्मद का काबल ु पर आक्रमण ii. नजर मोहम्मदका समरकंद पर अधिकार iii. मग ु लों का बदख्शाँ और बल्ख पर आक्रमण iv. मरु ाद का वापस लौटना v. बल्ख पर औरं गजेब का आक्रमण vi. अब्दल ु अज़ीज़ से संधि c. परिणाम i. जनधन की हानि ii. मग ु लों की प्रतिष्ठा को प्रबल आघात iii. उद्दे श्यों की प्राप्ति में सफलता 6. औरं गजेब की उत्तर पश्चिमी सीमा नीति 7. असफलता के कारण a. मग ु ल सेवा में अफ़गानों का होना b. मग ु ल बादशाहों की अधरू दर्शिता c. मग ु ल सेवा के अधिकारियों का आरोग्य होना d. शाहजहां व औरं गजेब की हिंद ू विरोधी नीति e. मग ु ल सहजादों में परस्पर सहयोग का अभाव f. साम्राज्य की विशालता g. उत्तर पश्चिमी सीमा की भौगोलिक स्थिति 1. भक्ति आंदोलन की पष्ृ ठभमि ू 2. उदय के कारण a. इस्लामी शासको के अत्याचार b. आश्रय की खोज c. यह सरल मार्गथा d. वैदिक धर्म की जटिलता e. संयक् ु त शक्ति की आवश्यकता f. धर्म और समाज की जटिलता g. इस्लाम धर्म का प्रभाव 3. भक्ति मार्ग के मख् ु य सिद्धांत a. ईश्वर एक है b. ईश शक्ति में एकाग्रचितत्ता c. आत्मसमर्पण का सिद्धांत d. गरु ु महत्व का सिद्धांत e. शभ ु कर्म और मां की पवित्रता का सिद्धांत f. प्राणी मात्र की एकता का सिद्धांत g. सगन ु एवं निर्गुण उपासना का सिद्धांत 4. प्रमख विशे ष ताएं ु a. सामाजिक समानता पर बाल b. धार्मिक कर्मकांडों एवं आडंबरों की आलोचना c. एक ईश्वर में विश्वास d. लोक भाषा का प्रयोग e. जन आंदोलन f. हिंद ू मस्लि म एकता प्रबल ु g. निवत्ति ृ मार्ग का विरोध 5. नानक की भमि ू का 6. कबीर की भमि ू का a. धार्मिक कर्मकांडों की आलोचना b. जाति का खंडन c. शद् ु ध कर्म व आचरण पर बाल d. प्रेम साधन व वास्तविक ज्ञान पर बाल e. ईश्वर की भक्ति पर बाल f. हिंद ू मस्लि मएकता पर बाल ु 7. प्रभाव a. धार्मिक सहिष्णत ु ा का उदय b. सामाजिक समानता c. धार्मिक पाखंडों में शिथिलता d. निराशा हिंद ू जनता में नवीं शक्ति का संचार e. एक स्वस्थ समाज का निर्माण f. राजनीतिक प्रभाव g. प्रांतीय भाषाओं को प्रोत्साहन 1. सामाजिक जीवन a. समाज b. भोजन व वेशभष ू ा c. त्यौहार वमनोरं जन के साधन d. स्त्रियों की दशा 2. आर्थिक दशा a. कृषि b. उद्योग c. व्यापार 3. धार्मिक स्थिति a. हिंदध ू र्म b. सफ ू ी संप्रदाय c. सिख संप्रदाय d. धार्मिक सहिष्णत ु ा e. धार्मिक विश्वास अकबर के भमि ं ी कार्य / मग ू सध ु ार संबध ु ल भू राजस्व व्यवस्था 1. जागीर प्रथा को समाप्त करना 2. भमि ू नापने के लिए नए पैमाने का प्रयोग करना - जरीब न की तनाव 3. भमि ू लगान का ‘दस सालह ’ प्रबंध 4. मालगज ु ारी विभाग को उन्नत करना a. दीवान अब्दल ु मजीद b. दीवान मज ु फ्फर खान c. टोडरमल d. टोडरमल दीवान ए अशरफ 5. दहसाला प्रबंध a. भमि ू मापन - ज़रीब (बाँस के साथ लोहे के छल्ले) b. भमि ू का वर्गीकरण - पोलज, परोती, चाचर, बंजर c. औसत उपज का निर्धारण d. कृषि उपज में राज्य का भाग निश्चित करना - ⅓ e. लग्न का नकद मल् ू य निश्चित करना f. पट्टा तथा कुबलि ु यत की प्रणाली g. मालगज ु ारी की तीन प्रणालियों - जब्ती, गल्ला बख्शी, नस्क h. मालगज ु ारीविभाग के कर्मचारी - आमिल, बीतीकची 6. प्रभाव शाहजहां का यग ु स्वर्ण यग ु था 1. मग ु ल साम्राज्य का विस्तार 2. साम्राज्य में शांति और व्यवस्था 3. उत्तम शासन व्यवस्था 4. सम्राट की न्याय प्रियता 5. लोकोपकारी कार्यों में रुचि 6. साहित्य के क्षेत्र में उन्नति 7. आर्थिक समद् ृ धि 8. कल के क्षेत्र में उन्नति स्वर्ण यग ु नहीं था 1. प्रशासन की शिथिलता 2. सैनिक दर्ब ु लता 3. जनता का दख ु ी जीवन 4. धार्मिक सहिष्णत ु ा 5. सामाजिक भेदभाव 6. शाहजहां का दर्ब ु ल चरित्र मनसबदारी व्यवस्था 1. मनसबदारी प्रथा का अर्थ 2. विशेषताएं a. सैनिक और असैनिक दोनों प्रकार के प्रशासनमें मनसबदार b. मानसबदारों की श्रेणियां 3. गण ु 4. दोष c. हुलिये तथा दाग प्रथा कीअनिवार्यता d. मांसाबदारों की नियक्ति तथा पदोन्नति ु e. मानसबदारों के वेतन f. जात तथा सवार a. योग्य की सेवाएं प्राप्त होना b. मग ु ल साम्राज्य की सरु क्षा c. सैन्य संगठनों के दोषों को दरू करना d. कल और साहित्य की उन्नति e. शक्ति तथा प्रतिष्ठा में वद् ृ धि f. प्रशासनिक जटिलताओं से मक्ति ु a. सैनिकों में राष्ट्रीय भावना का अभाव b. सैनिकों की कार्य क्षमता पर विपरीत प्रभाव c. सैनिकों में सम्राट के प्रति स्वामी भक्ति का अभाव d. सेना में भ्रष्टाचार e. विलास प्रियता में वद् ृ धि f. मानसबदारों में आपसी वैमनष्य
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